वरला में प्रस्तावित श्रीराम मंदिर, संकल्प जो अब आकार ले रहा है।
वरला में प्रस्तावित श्रीराम मंदिर, संकल्प जो अब आकार ले रहा है।
राजस्थान से आई शिलाओं की धूमधाम से आगवानी
सेंधवा (नरेंद्र तिवारी )वरला में प्रस्तावित श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए गाँववासियों का उत्साह देखते बनता है। मंगलवार को मंदिर निर्माण के लिए राजस्थान से शिलाएं आई तो पूरा वरला झूम उठा, शिलाओं से भरे वाहन को मुख्य मार्गो पर घुमाया गया, पूजा अर्चना कर शोभायात्रा निकाली गयी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत वरला में अयोध्या की तर्ज पर बनने वाले श्रीराम मंदिर को लेकर स्थानीय रहवासियों एवं ग्रामीणों का उत्साह चरम पर है, प्रतिदिन मंदिर परिषर में कार सेवा की जा रही है। साफ सफाई, खुदाई सहित श्रम गतिविधियों को लेकर हर गाँववासी अपनी भागीदारी करना चाह रहा है। मंगलवार 23 सितम्बर को शाम 5 बजे शिलाओं से भरा ट्रक वरला पहुंचा तो शिलाओं की आगवानी के लिए पूरा गाँव एकत्रित था। गाँव के सरपंच जोड़े से मौजूद थै, जिन्होंने विधि विधान से शिलाओं का पूजन किया। श्रीराम मंदिर समिति के वरिष्ठ सदस्य ओम प्रकाश पांडे, अशोक नुवाल एवं अनिल चौरसिया सहित गाँव के महिला पुरुष इस अवसर पर निकली शोभायात्रा में शामिल थै। वरला के रुपेश जैन ने बताया सम्पूर्ण वरला क्षेत्र में निर्माणाधीन श्री राम मंदिर को लेकर बहुत उत्साह है। शिलाओं के आने से मंदिर निर्माण कार्य में तेजी आने की संभावना है।
वरला क्षेत्र का श्रीराम मंदिर जैसे सम्पूर्ण वरला ग्राम एवं आसपास के गाँवो के लिए संकल्प बन गया है। मंदिर का निर्माण जैसे जैसे आगे बढ़ रहा है उत्साह में वृद्धि होती जा रही है। अपने आराध्य भगवान श्रीराम के वरला में प्रस्तावित मंदिर निर्माण की दीवानगी मंदिर समिति के सदस्यों को जिस पैमाने पर दिखाई दे रही है,उससे अधिक यह संकल्प वरला ग्राम सहित आसपास के ग्रामों का दिखाई दे रहा है। इसमें सभी जाति, समाज के लोगो की भागीदारी भी दिखाई दे रही है। इसमें अनेको सदस्यों का बरसों से संकल्प था जो अब पूरा होता दिखाई दे रहा है। राजस्थान से आई शिलाओं के उपरांत संकल्प आकार लेता दिखाई देने लगेगा। ईश्वर के प्रति आस्था और संकल्प की शक्ति को मजबूती से पूर्णता की और बढ़ता देख श्रीराम के सच्चे भक्तों में प्रसन्नता ख़ुशी और उल्लास का वातावरण है। देखा जा रहा है की जो धन से सक्षम है मुक्त हस्त से दान दे रहे है तो अपने शारारिक श्रम से अमूल्य दान भी इतिहास में दर्ज होगा।
