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विद्वान् पंडितो का मत 2 मार्च को होलिका दहन, 3 मार्च को धूलंडी

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 सेंधवा (नरेंद्र तिवारी ) 3 मार्च को लगने वाले ग्रहण को लेकर होलिका दहन एवं धुलंडी की तिथि को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई थी। इस विषय में स्पष्ट निर्णय लेने हेतु अग्रवाल समाज एवं ब्राह्मण समाज के पदाधिकारियों द्वारा नगर के विद्वान पंडितों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक में पंचांग एवं धर्मसिंधु के आधार पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
अग्रवाल समाज के सुनील अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि बैठक में पंडित राधा माधव शर्मा, पंडित सुदर्शन शर्मा, पंडित राधाकिशन व्यास, पंडित पीकेश कुमार शर्मा, पंडित अशोक लाठा, पंडित ओम प्रकाश शर्मा एवं पंडित प्रशांत तिवारी ने होलिका दहन एवं धुलंडी की तिथि पर गहन मंथन किया। सभी विद्वानों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि होलिका दहन 2 मार्च को किया जाएगा तथा उसके दूसरे दिन 3 मार्च को ही धुलंडी मनाई जाएगी।
पंडित सुदर्शन शर्मा ने बताया कि उनके पास उपलब्ध सातों पंचांगों में कहीं भी 4 मार्च को धुलंडी मनाने का उल्लेख नहीं है। विद्वानों का मत था कि रंग खेलने का ग्रहण से कोई संबंध नहीं है, इसलिए धुलंडी 3 मार्च को ही शास्त्रसम्मत रूप से मनाई जाएगी। पंडित राधामाधव शर्मा ने कहा कि धुलंडी 3 मार्च को मनाई जा सकती है रंग खेलने में ग्रहण से प्रत्यक्ष रूप से कोई दोष नहीं है । होली जलने के बाद महिलाएं माता का डोरा लेती है वह 3 मार्च को ग्रहण होने से वे 3 मार्च को सुबह 6 बजे से पहले या फिर 4 मार्च को ही डोरा लेवे ।
अग्रवाल ने बताया कि धुलंडी के अवसर पर समाज के पदाधिकारी एवं समाजजन परंपरा अनुसार 3 मार्च को गमी परिवारों के घर जाकर होली का रंग डालते हैं, जिससे सामाजिक समरसता एवं पारिवारिक आत्मीयता बनी रहती है।
बैठक में अग्रवाल समाज अध्यक्ष श्यामसुंदर तायल, कैलाश एरन, गिरधारी गोयल, राकेश एरन, राहुल गर्ग, सौरभ तायल, सुनील अग्रवाल, ओम प्रकाश मंगल तथा ब्राह्मण समाज के विनोद शर्मा, बद्रीप्रसाद शर्मा, राधेश्याम शर्मा, दामोदर शर्मा सहित अन्य समाजजन उपस्थित रहे।

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