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पलायन से कराहते बड़वानी जिले में प्रदेश के मुखिया का स्वागत है  – नरेन्द्र तिवारी सेंधवा

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पलायन से कराहते बड़वानी जिले में प्रदेश के मुखिया का स्वागत है  – नरेन्द्र तिवारी सेंधवा

*पालायन को रोके बिना, कैसे सम्भव जनजातीय विकास…?*

*फिलहाल मक्का के कम भाव किसानो की चिंता की वजह*

*प्रदेश के मुखिया जब बड़वानी जिले में आ रहे हो तब उन्हें यह बताना भी बेहद जरुरी है की श्रीमान मुख्यमंत्री जी बड़वानी जिले के हजारों परिवार दो जून की रोटी कमाने अपना घर बार छोड़ कर परिवार के साथ महाराष्ट्र या गुजरात गए है। मजदूरी के लिए अंयंत्र प्रदेशों में जाने का सिलसिला नया नही है। यह 15-20 सालो से जारी है। बीते 10 सालों में पलायन जिले का स्थाई भाव हो गया है। आपको जिले के अधिकारी एवं पानसेमल के युवा विधायक श्याम बर्डे सांसद सदस्य यह अँधेरी सच्चाई शायद न बता सके। बताएं भी क्यों क्या कभी सत्ता पक्ष प्रदेश के मुखिया को अँधेरे पक्ष से अवगत कराता है..? ऐसा करना तो सत्ता पक्ष के नेता की शान के खिलाफ हो गया है। विपक्षी खेमे की भी बड़वानी जिले की इस सबसे बड़ी समस्या को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की कोई योजना दिखाई नही देती है। जबकि चार में से तीन विधायक विपक्षी पार्टी के है। खैर आपको यह बताते हुए बड़ा दुख हो रहा है की स्थानीय स्तर पर रोजगार नही होने से इस जिले के गाँव के गाँव अपने परिवार के संग जिसमे दूध पीते बच्चो से लगाकर 8 से 10 साल के वह बच्चे भी शामिल है, जिनको होना तो स्कुल चाहिए था, किंतु परिवार के साथ जाने की मजबूरी के कारण अपनी शिक्षा छोड़ परदेश में रहना पड़ रहा है। शायद महाराष्ट्र और गुजरात में बड़वानी जिला श्रमिक जिले के रुप में जाना जाता है जहां इस जिले के आदिवासी परिवार मजदूरी करते है। बड़वानी जिले की चारों विधानसभा के हाल अमूमन एक जैसे है। श्रमिक जिले का ठप्पा जनजातीय बाहुल्य बड़वानी जिले के माथे पर चस्बा कर दिया है। महाराष्ट्र और गुजरात में यह चर्चा आमतौर पर होती है की बड़वानी जिले के श्रमिक मजबूत होते है। किंतु दुर्भाग्य की इन मजबूत मजदूरों के पास अपने देश में काम की कमी है।*

*काँटन उद्योग बदहाल व्यवसाई भी पलायन को मजबूर*

*मुख्यमंत्री जी आपको बताते हुए मन बेहद दुखी है की जिले में सेंधवा और खेतिया बड़ी कपास की मंडी मानी जाती थी। यहाँ बड़ी सख्या में जिनिंग प्रेसिंग थै जिनपर अब ताले लग गए है। कपास उद्योग की बदहाली के लिए बहुत हद तक प्रदेश सरकार की नीती भी जवाबदेह है जिनमे मंडी टेक्स भी एक कारण है। जिसके चलते जिनिंग मालिकों ने अपनी जिनिंग महाराष्ट्र में स्थापित कर ली। सेंधवा खेतिया का कपास उद्योग अपनी अंतिम सांसे गिनता दिखाई दे रहा है।*

*मक्का के कम भाव से किसान परेशान*
*बड़वानी जिले में एक और जहां कपास उद्योग अंतिम साँसे गिन रहा है इसे देखते क्षेत्र के किसानों ने बड़ी मात्रा में मक्का की बुआई तो कर ली किंतु उचित भाव नही मिलने से किसान को घाटे का सामना करना पढ़ रहा है। मंडी में मक्का से भरे वाहनो को उचित दाम नही मिल पा रहा है। भावंतर का ढिंढोरा बहुत पीटा जा रहा है किंतु बताया गया है की मक्का से इस योजना का संबंध नही है। बड़वानी के पानसेमल विकासखंड के ग्राम मोर तलाई में जनजातीय गौरव दिवस के उपलक्ष्य में पधारे मुख्यमंत्री महोदय से आग्रह है की जिले में पलायन की समस्या के निदान हेतु बड़े उद्योगो की स्थापना की जावे। खेती को लाभ का धंधा बनाए जाने हेतु प्रयास किया जाएं। किसानों की मक्का की फसल का समर्थन मूल्य घोषित किया जाए।*

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