सेंधवा (नरेंद्र तिवारी) राजस्थान के झालावाड जिले की एक स्कुल में छत गिरने से घटित दुर्घटना के बाद एमपी के आदिवासी जिले बड़वानी की सेंधवा जनपद के ग्राम गेरूघाटी मिडिल स्कुल के बच्चो में भय व्याप्त है। यहां स्कुल के बच्चों का पढ़ाई में कम जर्जर छत के उखड़े प्लास्टर पर अधिक ध्यान रहता है। यह मिडिल स्कुल का भवन बेहद पुराना हो गया है, जिसकी छत कमजोर हो गयी है। छात्र उखड़ी छत को देखकर भयभीत है।
आदिवासी शिक्षा को बेहतर और गुणवत्ता युक्त बनाए जाने के सरकारी दावों की पोल सेंधवा जनपद क्षेत्र के ग्राम गेरूघाटी की मिडिल स्कुल का भवन देखकर खुल जाती है। मिडिल स्कुल का भवन काफ़ी पुराना हो गया है। वैसे तो पूरा स्कुल भवन ही दयनीय स्थिति में किंतु कुछ कमरों की हालत ऐसी हो गयी है की आए दिन प्लास्टर उखड़ रहा है। इस स्कुल में 200 से अधिक बच्चे अध्ययनरत है। यहां छत का प्लास्टर उखड़ गया है, आए दिनों छत टूटकर गिरती रहती है। भवन के आभाव में इस जर्जर छत के निचे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे पढ़ने को विवश दिखाई दे रहे है। राजस्थान के झालावाड जिले की ग्रामीण स्कुल में छत टूटकर गिरने की घटना के बाद यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों का पढ़ाई पर कम छत के उखड़े प्लास्टर पर अधिक ध्यान रहता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है की भवन करीब 30 वर्ष पुराना हो गया है। जो बेहद कमजोर स्थिति में है। जिसके बरसात में गिरने का भय बना हुआ है। यहां के रहवासियों ने यह भी बताया की नियमित शिक्षकों का आभाव है। यहां 9 अतिथि शिक्षकों के भरोसे विधालय चल रहा है। लड़कियो के लिये शौचालय नहीं है। पेयजल का भी अभाव है। टूटी छत और नियमित शिक्षकों के आभाव में संचालित ग्राम गेरूघाटी की यह मिडिल स्कुल ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की दुर्दशा को दर्शाती है। आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था लाखों रु खर्च करने के बाद भी भवनो, नियमित शिक्षकों, एवं आवश्यक सुविधाओं से जूझ यही है।