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मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी के तहत पोरलाल खरते की छोटा जुलवानिया यात्रा

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सेंधवा से सिर्फ 2 किमी… पर विकास अब भी मीलों दूर!

मेरा गांव मेरी जिम्मेदारी के तहत पोरलाल खरते की छोटा जुलवानिया यात्रा

सेंधवा (नरेंद्र तिवारी ) कांग्रेस नेता और विगत लोकसभा में खरगोन – बड़वानी लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस प्रत्याक्षी रहे पोरलाल खरते ने अपनी मेरा गाँव मेरी जिम्मेदारी यात्रा के तहत सेंधवा विकासखंड की निकटतम छोटा जुलवानिया ग्राम पंचायत की यात्रा की उन्होंने इस यात्रा का सच और गाँव विकास की असल कहानी अपने शब्दों में बताई
उनके अनुसार 19 नवंबर 2025 शाम 6 बजे यात्रा छोटा जुलवानिया (जनसंख्या लगभग 1700, चार फलिया) पहुंची। गांव में शिक्षा, सड़क, बिजली, पानी, रोजगार और स्वास्थ्य—हर क्षेत्र में गंभीर कमी दिखाई दी।

मुख्य समस्याएँ

शिक्षा: दो प्राथमिक व एक मिडिल स्कूल, पर कक्षाएँ एक से तीन तक के विद्यार्थी एवं चार से पांच तक के विद्यार्थी एक ही कमरे में बैठते हैं । शिक्षकों की कमी, पालक–शिक्षक संघ की बैठकें नहीं, विशेष ग्राम सभा की जानकारी नहीं।

सड़क–बिजली–पानी: गांव तक पक्की सड़क नहीं। सभी फलियों में बिजली का विस्तार अधूरा। पाइपलाइन है, पर टंकी और नलकूप बंद—ग्रामीण अपनी व्यवस्था से पानी जुटाते हैं।

रोजगार व अर्थव्यवस्था: खेत छोटे, फसल का उचित दाम नहीं। अधिकतर लोग सेंधवा में मजदूरी करते हैं। गांव में स्वरोजगार के अवसर लगभग शून्य।

स्वास्थ्य: प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र अक्सर बंद। एएनएम/सीएचओ की जानकारी भी गांव में नहीं।

अन्य मुद्दे: विकलांगजन की पेंशन ₹600 से बढ़ाकर ₹3000 करने की मांग।
गांव बसाने वाले पटेल चिंतामन पाटील बताए जाते हैं।

यात्रा में सहयोगी साथी सीताराम बर्डे जनपद उपाध्यक्ष, महेन्द्र सेनानी, प्रकाश जमरा, संदीप लोहारिया आदि । जनसंवाद में लगभग 50–60 युवा और वरिष्ठजन शामिल हुए।

यात्रा का संदेश
यात्रा में कहा गया कि गांव की समस्याओं का समाधान हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। सबसे अधिक ध्यान शिक्षा पर होना चाहिए, क्योंकि शिक्षित व्यक्ति बाकी समस्याओं का समाधान स्वयं खोज सकता है। गांव में छोटी-छोटी दैनंदिनी आवश्यकता देने की आवश्यकता की चीजों के लिए गांव के ही युवा दुकान खोले और युवाओं को व्यापार व स्वरोजगार में कदम बढ़ाना चाहिए। अपनी संस्कृति, रीति–रिवाज व गांव के इतिहास का संरक्षण अनिवार्य है—इसके लिए गांव का इतिहास शोधकर लिखना चाहिए। साथ ही मतदाता गहन पुनरीक्षण में सभी लोग सक्रिय रहकर यह सुनिश्चित करें कि गांव का एक भी मतदाता छूटे नहीं, जिसमें युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं को नशा से दूर रहने की जरूरत है ।

मुख्य प्रश्न

तहसील मुख्यालय से सिर्फ 2 किमी दूरी पर बसे गांव की हालत आज भी ऐसी क्यों? यह प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर संकेत है।

मांग

शासन सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर त्वरित कार्रवाई करे।

यात्रा संयोजक — पोरलाल खर्ते एवं साथी

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