सेंधवा (न्यूज करंट ) एकल अभियान ओर श्रीहरि कथा सत्संग समिति के तत्वाधान में सेंधवा किले के अंदर मंडी शेड प्रांगण में पंचम दिवस की कथा में सुश्री गीता किशोरी ने कहा कि जगत जननी माता जानकी के विदाई समय माता सुनयना कहती है !
सासू ससुर गुरु सेवा करेहु पति रुख लखी आयुष अनुसरेहू।
आदरपूर्वक सास-ससुर के चरणों की पूजा (सेवा) करने से बढ़कर दूसरा कोई धर्म नहीं है। आज कल की माता कुछ ओर ही समझा कर भेज देती हैं और जो बाकी बचता है मोबाइल से प्रतिदिन सुबह शाम (दूध में नमक की तरह ) ज्ञान बाटती रहती हैं। जो पुत्रवधू आदरपूर्वक सास ससुर गुरु पति की सेवा करती हैं उनके लिए संसार में इससे बढ़कर धर्म और कुछ है ही नहीं कथा वाचक ने कहा कि बेटे को पढ़ाना पिता का कर्तव्य हे किंतु उसको इतना भी नहीं पढ़ा देना कि वह आपको छोड़ कर चला जाए उसको पढ़ाई के साथ साथ संस्कार भी देना ताकि वह बुढ़ापे में अपने माता पिता की सेवा करे भरत चरित्र का कथा गायन में गीता किशोरी कहती है कि
भरत चरित कीरति करतूति ,धर्म शील गुण विमल विभूति”
भरत का चरित्र, यश, कर्म, धर्म, शील, गुण और निर्मल ऐश्वर्य”। यह पंक्ति भरत जी के गुणों का वर्णन करती है, जो राम के प्रति उनकी अटूट भक्ति और निस्वार्थ सेवा को दर्शाती है। परंतु वर्तमान समय में तो भाई भाई का ही दुश्मन बना हुआ। हमे अपने भाई भगवान ही मानना चाहिए। इनसे अटूट प्रेम करना चाहिए वरना घर बिखर जाएगा। आज मार्निंग वाक ग्रुप मातृशक्ति महिला मंडल सत्यनारायण महिला मंडल ने शाल श्री फल माला से कथावाचक गीता किशोरी का स्वागत किया आज के प्रसाद दाता विवेक गुप्ता आनंदन हॉस्पिटल थे।