सेंधवा (नरेंद्र तिवारी ) विधानसभा क्षेत्र के ग्राम गेरूघाटी में आदिवासी अधिकार सम्मेलन का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी एवं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंधार विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे तथा जनसंपर्क विधायक कार्यालय का उद्घाटन करेंगे। उद्घाटन उपरांत दोनों नेता विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे।
यह सम्मेलन सेंधवा विधानसभा की पिछड़ी एवं वर्षों से उपेक्षित वरला तहसील के आदिवासी समाज को उनके संवैधानिक हक-अधिकार, सम्मान और समान विकास दिलाने की निर्णायक लड़ाई का सशक्त मंच है। वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित आदिवासी अंचल की आवाज़ को मजबूती देने और शासन-प्रशासन तक उनकी पीड़ा पहुँचाने के उद्देश्य से इस सम्मेलन का आयोजन किया गया है।
जनसभा में प्रमुख रूप से वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत 8000 से अधिक लंबित वन अधिकार पट्टों का मुद्दा उठाया जाएगा। इन पट्टों के अभाव में हजारों आदिवासी परिवार आज भी अपने वैधानिक और संवैधानिक अधिकारों से वंचित हैं।
इसके साथ ही वरला तहसील में नर्मदा जल योजना का लाभ नहीं पहुँच पाना भी जनसभा का प्रमुख विषय रहेगा। वर्तमान में नर्मदा जल योजना का लाभ केवल 67 ग्रामों तक सीमित है, जबकि बड़ी संख्या में आदिवासी ग्राम आज भी नर्मदा के पवित्र जल से वंचित हैं, जो गंभीर अन्याय और भेदभाव का प्रतीक है।
सम्मेलन में किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य न मिलना, बढ़ती लागत के बावजूद समर्थन मूल्य का लाभ न मिलना, आर्थिक शोषण, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी, बेरोजगारी के कारण बढ़ता पलायन तथा मनरेगा मजदूरों को 8–9 माह तक मजदूरी का भुगतान नहीं होने जैसे ज्वलंत मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए जाएंगे।
इस सम्मेलन के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया जाएगा कि आदिवासी समाज के अधिकारों की लड़ाई अब केवल मांग नहीं, बल्कि सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती और प्रतिबद्धता के साथ लड़ी जाएगी।
यह आयोजन सेंधवा विधायक श्री मोंटू सोलंकी जी के नेतृत्व में वरला तहसील का अब तक का सबसे बड़ा एवं ऐतिहासिक राजनीतिक कार्यक्रम है। इससे पूर्व इस क्षेत्र में न तो इस स्तर का कोई जनआंदोलन हुआ है और न ही प्रदेश स्तर के बड़े नेताओं की इतनी प्रभावी उपस्थिति रही है। यह सम्मेलन आदिवासी समाज के स्वाभिमान, अधिकार और समग्र विकास की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
क्षेत्रवासियों में इस आयोजन को लेकर भारी उत्साह है तथा बड़ी संख्या में जनभागीदारी की संभावना है।