Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
JPSC परीक्षा धांधली: सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल; सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में SIT और CBI जांच... Gauri Shiksha Foundation के चेयरमैन Mukesh Sharma ने 12वें विशाल कांवड़ सेवा शिविर में श्रद्धालुओं क... जुलवानिया से ओंकारेश्वर तक निकली पैदल कांवड़ यात्रा, कसरावद में भाजपा नेताओं ने किया स्वागत ग्राम केलपानी से ओंकारेश्वर तक 200 ग्रामीणों की पैदल यात्रा, विधायक मोंटू सोलंकी ने जयघोष के साथ किय... थाना सेंधवा शहर पुलिस ने ऑनलाइन पटाखों के नाम पर ₹50,000 की ठगी करने वाले 02 साइबर ठगो को इंदौर से क... स्टार एग्री की रिपोर्ट के बाद खंडेलवाल बन्धुओ की शिकायत अधिवक्ता विमला शर्मा महामडलेश्वर की उपाधि से सम्मानित ग्रेटर नोएडा पुलिस द्वारा चांदी व्यापारी से लूटे गए एक करोड़ 28 लाख के आभूषण बरामद कर 48 घंटे बाद ही ... जिला पंचायत अध्यक्ष, सदस्यों एवं सेंधवा विधायक श्री मोंटू सोलंकी ने सीईओ द्वारा आरोप-पत्र का जवाब नह... भागवत आयोजन का आरम्भ निकली शोभायात्रा 

जिला पंचायत अध्यक्ष, सदस्यों एवं सेंधवा विधायक श्री मोंटू सोलंकी ने सीईओ द्वारा आरोप-पत्र का जवाब नहीं देने पर सामान्य सभा का किया बहिष्कार।

0 274

बड़वानी (नरेंद्र तिवारी ) जिला पंचायत बड़वानी की सामान्य सभा की बैठक में उस समय तीखा विवाद उत्पन्न हो गया, जब जिला पंचायत अध्यक्ष श्री बलवंत सिंह पटेल एवं जिला पंचायत सदस्यों द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) जिला पंचायत को पूर्व में जारी आरोप-पत्र एवं कारण बताओ नोटिस का कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। जवाब नहीं मिलने से नाराज जनप्रतिनिधियों ने बैठक में कड़ा विरोध दर्ज कराया और अंततः सामान्य सभा की बैठक का बहिष्कार कर दिया।

जिला पंचायत अध्यक्ष एवं सदस्यों ने बताया कि सीईओ जिला पंचायत को मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 तथा जिला पंचायत (कार्य) नियम, 1998 के कथित उल्लंघन, वित्तीय अनियमितताओं, प्रशासनिक स्वेच्छाचारिता, नियमों की अवहेलना एवं जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा जैसे गंभीर आरोपोंh के संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद कोई संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे स्पष्ट है कि अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों और लोकतांत्रिक व्यवस्था को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

बैठक में सेंधवा विधायक श्री मोंटू सोलंकी ने भी जिले की कई गंभीर जनसमस्याओं को मजबूती से उठाया। उन्होंने कहा कि सेंधवा विधानसभा क्षेत्र के 160 स्कूल आज भी शिक्षकविहीन हैं तथा 470 विषयवार शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हैं। यह स्थिति हजारों विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। सहायक आयुक्त, आदिम जाति कल्याण विभाग से इस संबंध में जानकारी मांगी गई, लेकिन कोई स्पष्ट एवं संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। अधिकारियों ने स्वयं स्वीकार किया कि 160 स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, इसके बावजूद वर्षों से रिक्त पदों को भरने की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

विधायक श्री मोंटू सोलंकी ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि कई अस्पतालों में डॉक्टरों के पद खाली हैं, आवश्यक दवाइयों की कमी बनी हुई है और ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है। सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन धरातल पर स्थिति बिल्कुल अलग दिखाई देती है।

बैठक में आदिवासी छात्रावासों में अध्यक्षों की नियमविरुद्ध नियुक्तियों का मामला भी जोरदार तरीके से उठाया गया। जनप्रतिनिधियों ने बताया कि नियमों के अनुसार छात्रावास अध्यक्ष का कार्यकाल अधिकतम तीन वर्ष होना चाहिए, लेकिन कई छात्रावासों में एक ही व्यक्ति 15-15 वर्षों से अधिक समय से पद पर बना हुआ है। कई अध्यक्षों का मूल पद अन्य स्थानों पर होने के बावजूद उन्हें नियमों के विपरीत अटैच कर रखा गया है, जिससे पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

जब बार-बार मांग करने के बाद भी आरोप-पत्र पर कोई स्पष्ट जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया, तब जिला पंचायत अध्यक्ष श्री बलवंत सिंह पटेल, सभी जिला पंचायत सदस्यों एवं सेंधवा विधायक श्री मोंटू सोलंकी ने इसे जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की अवहेलना बताते हुए सामान्य सभा की बैठक का बहिष्कार कर दिया।

जनप्रतिनिधियों ने स्पष्ट कहा कि केवल “जांच करवा देंगे” या “देख लेंगे” जैसे औपचारिक आश्वासन अब स्वीकार्य नहीं हैं। जब तक आरोप-पत्र का विधिसम्मत जवाब, निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई नहीं होती, तब तक पंचायत व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता स्थापित नहीं हो सकती।

उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आदिवासी छात्रावासों, पंचायत प्रशासन एवं विकास कार्यों से जुड़े सभी मामलों में तत्काल प्रभाव से ठोस कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता को उसका अधिकार मिल सके और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों का सम्मान हो।

जनप्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि कुछ लोग मंचों और सोशल मीडिया पर बड़े-बड़े दावे करते हैं कि उन्होंने यह करवा दिया, वह करवा दिया, लेकिन वास्तविकता सरकारी बैठकों और जमीनी हालात में साफ दिखाई देती है। यदि सब कुछ ठीक होता तो 160 स्कूल शिक्षकविहीन नहीं होते, 470 शिक्षकों के पद रिक्त नहीं रहते, अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी नहीं होती और प्रशासनिक अनियमितताओं पर इतने गंभीर सवाल खड़े नहीं होते। जनता अब दावों और प्रचार से नहीं, बल्कि धरातल पर होने वाले कार्यों और परिणामों से निर्णय करेगी। बैठक जिला पंचायत सदस्य राजकला सोलंकी, जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि राजू पटेल जिला पंचायत सदस्य जामबाई रमेश आदि सदस्य उपस्थित रहे।

Leave A Reply

Your email address will not be published.