कलेक्टर ही जिले के सभी छात्रावासों के विधार्थियों से मिले
कलेक्टर ही जिले के सभी छात्रावासों के विधार्थियों से मिले
अब पुरुषखेड़ा निवाली के विद्यार्थी कलेक्टर से मिलने पैदल निकले
बड़वानी ( नरेंद्र तिवारी) जिले की विभिन्न तहसीलों में स्थित छात्रावासों कन्या परिषर एकलव्य शिक्षा परिषर सहित शिक्षा से जुडी सस्थाओं के विद्यार्थियों का अपनी समस्याओं के लिये जिला कलेक्टर से मिलने हेतु पैदल रवाना होने के घटनाक्रम लगातार घटित हो रहे है। सोमवार को निवाली के पुरुषखेड़ा के छात्र छात्राएं अपनी मांगो को लेकर कलेक्टर से मिलने पहुँचे। इससे पूर्व सेंधवा के मंडगाँव कन्या शिक्षा परिषर की छात्राएं अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर जिला कलेक्टर बड़वानी से मिलने पैदल निकल पड़ी थी। अब सवाल यह उठता है की जिले में समस्याओं से ग्रसित छात्रावासों शिक्षा परिषरों में व्याप्त समस्याओं की अनदेखी क्यों हो रही है? क्यों हर समस्या के लिये छात्र एसडीएम तहसीलदार की बजाए कलेक्टर साहब को ही शिकायत करना चाह रहे है..? यह भी जांच का विषय है की इन विद्यार्थियों को कलेक्टर से मिलने पैदल जाने के लिये कोई उकसा तो नहीं रहा है…? खैर आदिवासी विकास विभाग में व्याप्त अनियमितताओं के चलते विद्यार्थियों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही है, स्टेशनरी, भोजन की गुणवत्ता, गणवेश जैसी समस्याओं से ग्रसित विद्यार्थी कलेक्टर साहब से मिलना चाहते है। उन्हें लगता है की कलेक्टर साहब उनकी समस्याओं का निराकरण करेंगे। ऐसे में बड़वानी जिले की महिला कलेक्टर गुंचा सनोबर को चाहिए की वें जिले के हॉस्टल कन्या परिषरो, खेल परिषरो, एकलव्य छात्रवासों का दौरा कर विद्यार्थियों से उनके परिषर में जाकर स्वयं बातचीत करें, विद्यार्थियों की परेशानियों को सुनें। कुछ सालों से कलेक्टरों का बड़वानी जिला मुख्यालय को ही सम्पूर्ण जिला समझने का भरम हो गया है। आपकी सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में जिला कलेक्टर गाँवो में रात्रि विश्राम करते थै। महीने दो या चार महीने में जिले के कलेक्टर महोदय का राउंड तहसील मुख्यालय के गाँवो में लगता था, विद्यार्थी सहित आमजन कलेक्टर से अपनी समस्याओं की चर्चा करते थै, कलेक्टर मौक़े पर एसडीएम, तहसीलदार को निर्देशित करते थै, अब ऐसा नहीं हो रहा कलेक्टर गाँव में नहीं पहुंच रहे तभी छात्रों को पैदल अपनी समस्याओं के लिये जिला मुख्यालय पहुंचना पड़ रहा है। बड़वानी जिले की संवेदनशील जिला कलेक्टर को चाहिए की वह आगामी दिनों में स्कुल छात्रावासों में व्याप्त समस्याओं का अवलोकन करें, उन्हें निराकृत करें ताकि विद्यार्थियों को आपसे मिलने बड़वानी पैदल रवाना होने की आवश्यकता न पड़े।
